विंध्य स्टोरी समाचार,डॉक्टर सचिन यादव, डॉ.राजपाल गौर, डॉ. अजय मौर्य और हीरा सिंह कौशल गिरफ्तार हैं। इन्होंने 8–10 लाख रुपए में MBBS की डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर खरीदा था। उसी के सहारे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में नौकरी पाई। फर्जी डिग्री देने में जीवाजी यूनिवर्सिटी और रीवा मेडिकल कॉलेज का भी नाम सामने आया है। पुलिस की जांच गहनता से जारी है। मुख्य आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस को इस नेटवर्क में शामिल 50 से ज्यादा फर्जी डॉक्टरों और सहयोगियों की सूची मिली है। पूरे राज्य में इसके लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। ये फर्जी डॉक्टर पिछले करीब डेढ़ साल से संजीवनी क्लीनिकों में रोजाना 30 से 40 मरीजों का इलाज कर रहे थे और सरकार से हर महीने ₹70,000 से ₹80,000 तक की सैलरी ले रहे थे। इस घटना के बाद मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नियुक्त सभी संविदा डॉक्टरों की डिग्रियों और मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन की दोबारा जांच शुरू करवा दी है।
मध्य प्रदेश में MMBS की फर्जी डिग्री से डॉक्टर बनने वाला गैंग पकड़ा गया
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