विंध्य स्टोरी समाचार अमरपाटन/मैहर
_📍अमरपाटन क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार अब किसी छिपे हुए खेल की तरह नहीं, बल्कि खुलेआम चल रहे सिस्टम प्रायोजित धंधे की तरह दिखाई देने लगा है। आरोप है कि शराब दुकानों से ही बिना नंबर की बाइकों के जरिए गांव-गांव शराब की सप्लाई की जा रही है और जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बने बैठे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि हालत ऐसे हो चुके हैं मानो क्षेत्र में कानून नहीं, बल्कि शराब माफियाओं का रूट परमिट चल रहा हो। बिना नंबर की बाइकें सड़कों पर दौड़ रही हैं, शराब की पेटियां गांवों तक पहुंच रही हैं, लेकिन आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन की नजर शायद चुनिंदा दिशा में ही जाती है।_
_⚠️ ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। सवाल उठ रहा है—जब आम आदमी बिना हेलमेट पकड़ा जाता है, तो बिना नंबर की बाइक से चल रही शराब तस्करी आखिर किसकी नजरों से बच रही है?क्षेत्र में चर्चा है कि शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब उन्हें कानून का डर नहीं, बल्कि संरक्षण का भरोसा ज्यादा है। गांव-गांव तक पहुंच रही शराब ने युवाओं को भी नशे की गिरफ्त में धकेलना शुरू कर दिया है।लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो अमरपाटन में नशे का जाल और गहराएगा, और फिर जिम्मेदार विभाग सिर्फ बैठकों में नशा मुक्ति अभियान की तस्वीरें जारी करते रह जाएंगे।_
_📢 ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और आबकारी विभाग से मांग की है कि बिना नंबर वाहनों की विशेष जांच अभियान चलाया जाए, शराब सप्लाई नेटवर्क का खुलासा हो और इस पूरे खेल के पीछे बैठे असली चेहरों पर कार्रवाई की जाए।_
_💣 अब बड़ा सवाल—क्या अमरपाटन में शराब तस्करी रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ जनता की है?या फिर जिम्मेदार विभाग कभी मौन व्रत तोड़कर मैदान में भी उतरेंगे?फिलहाल अमरपाटन में शराब माफियाओं की बाइकें दौड़ रही हैं… और प्रशासनिक सायरन अब भी खामोश हैं।_



